NHRC ने लिया बड़ा कदम: राजस्थान में बाल गिरवी प्रथा और मानव तस्करी पर आधिकारिक संज्ञान — हमारी शिकायत पर सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी

27 November 2025

National Crime Investigation Bureau (NGO), पश्चिम बंगाल टीम सदस्य मनीष जैन, द्वारा दायर शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार के शीर्ष अधिकारियों और छह जिलों के पुलिस अधीक्षकों को 4 सप्ताह में विस्तृत Action Taken Report (ATR) जमा कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

 

यह न केवल हमारे NGO के प्रयासों की बड़ी सफलता है, बल्कि उन सैकड़ों पीड़ित बच्चों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने का ऐतिहासिक कदम भी है, जिनकी पीड़ा समाज की नजरों से अब तक छिपी हुई थी।

 

 


 

क्या है मामला? — बच्चोें की गिरवी बिक्री और बंधुआ मज़दूरी की भयावह सच्चाई

हमारी शिकायत (दिनांक 02/10/2025) में बताया गया था कि राजस्थान के उदयपुर सहित आसपास के जनजातीय क्षेत्रों में गरीब और असहाय परिवारों को मजबूर किया जा रहा है कि वे सिर्फ ₹20,000 – ₹45,000 के बदले अपने 8 से 12 वर्ष के बच्चों को गड़रियों को गिरवी या स्थायी रूप से बेच दें।

 

भुगतान के बाद इन बच्चों पर अत्यंत दमनकारी और अमानवीय बंधुआ मज़दूरी थोपी जाती है—

 

रोज 30–35 किलोमीटर पैदल भेड़ों के साथ चलना

 

भोजन, आराम और स्वास्थ्य सुविधाओं से पूर्ण वंचित

 

बीमार पड़ने पर रास्ते में ही छोड़ दिया जाना

 

NGO या पुलिस पूछे तो गड़रियों द्वारा बच्चों से संबंध होने से इंकार

 

इस प्रथा की पुष्टि हाल ही में राजस्थान, गुजरात और इंदौर पुलिस की बचाव कार्रवाइयों में कई बच्चों के मिलने से हुई।

 

 


 

NHRC ने पाया—प्रथम दृष्टया गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन

 

 

माननीय सदस्य श्री प्रियंक कनूंगो, पीठ अध्यक्ष, ने मामले को गंभीर पाया और धारा 12, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत संज्ञान लेते हुए निम्न अधिकारियों को नोटिस जारी किए—

 

नोटिस किन अधिकारियों को भेजा गया?

प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान

पुलिस अधीक्षक — उदयपुर

पुलिस अधीक्षक — बांसवाड़ा

पुलिस अधीक्षक — डूंगरपुर

पुलिस अधीक्षक — प्रतापगढ़

पुलिस अधीक्षक — सिरोही

पुलिस अधीक्षक — पाली

 

इन सभी को आदेश दिया गया है कि वे शिकायत में लगाए आरोपों की विस्तृत जांच कर 4 सप्ताह में ATR आयोग को प्रस्तुत करें।

 

यह कार्रवाई दर्शाती है कि आयोग ने इस प्रथा को गंभीर, चल रहे और व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में स्वीकार किया है।

 

 


 

कानूनों का उल्लंघन!

 

यह प्रथा निम्न कानूनों का सीधा उल्लंघन है—

 

बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम

 

बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम

 

जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम

 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम

 

भारतीय संविधान: अनुच्छेद 21 (जीवन), 23 (शोषण विरुद्ध), 24 (बाल श्रम निषेध)

 

 


 

हमारी शिकायत में उठाई गई मांगे

 

जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक बचाव अभियान

 

सभी बच्चों का पुनर्वास, शिक्षा व चिकित्सा उपचार

 

प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही तय

 

मानव तस्करी नेटवर्क व गड़रियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई

 

भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सशक्त रोकथाम तंत्र

 


 

NHRC का जवाब — हमारे प्रयासों की बड़ी उपलब्धि

आयोग ने स्पष्ट लिखित आदेश में कहा है:

“शिकायत में लगाए गए आरोप मानवाधिकार उल्लंघन के प्रथम दृष्टया प्रतीत होते हैं। अतः विस्तृत जांच आवश्यक है।”

और आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप से निर्देश दिया है कि वे—

 “शिकायत में किए गए आरोपों की जांच कर 4 सप्ताह में विस्तृत ATR प्रस्तुत करें।”

 

यह हमारे NGO की संगठनात्मक मेहनत, प्रतिबद्धता और निरंतर संघर्ष का प्रत्यक्ष परिणाम है।

 

“यह बच्चों के जीवन और सम्मान का प्रश्न है। किसी भी गरीब परिवार की मजबूरी को बच्चों की गुलामी में नहीं बदला जा सकता। NHRC का त्वरित और सशक्त कदम सर्वोच्च स्तर पर संवेदनशीलता दर्शाता है। अब राज्य प्रशासन पर है कि वह बिना देरी कठोर कार्रवाई करे।”

Manish Jain

 

 


 

हमारा संकल्प: कोई भी बच्चा बेचा नहीं जाएगा, कोई भी बच्चा अकेला नहीं छोड़ा जाएगा

नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NGO) दृढ़ता से कहता है कि—

“हम इस प्रथा को समाप्त कराने के लिए हर

स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगे।

हर पीड़ित बच्चे की आवाज़ को उठाया जाएगा।

हर जिम्मेदार अधिकारी से जवाबदेही तय कराई जाएगी।”

About Manish Jain

🌍 A tireless social worker & human rights activist, I stand firm for children, women, and marginalized communities. With an unshakable voice against crime, corruption, and exploitation, I strive to ensure justice and dignity for all. ✊ Guided by the principle of selfless service, my mission is to build a fair, compassionate, and progressive society where every individual can live with equality, freedom, and respect. 📢 Follow my work and initiatives: https://x.com/ncib_manish